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चंद्रपुर- कलेक्टर ऑफिस के सामने ईरानी मस्जिद यहां पर शिया इस्ना आशरी ईरानी बहुउद्देशीय संस्था चंद्रपुर द्वारा सबीले इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम (पान पोई) का उद्घाटन चंद्रपुर के मशहूर वकील फरहात बेग के हाथों से हुआ.
कार्यक्रम मे प्रमुख उपस्थिति के रुप मे माजी नगरसेवक धनराज सावरकर थे. इस्लाम धर्म के आखरी पैगंमबर मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.व) के नवासे इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) जिन्होंने इस्लाम धर्म को बचाने के लिए अपने पूरे परिवार की कुर्बानी दि थी. कर्बला के मैदान में यज़ीद नामक बादशाह द्वारा इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके कुनबे को प्यासा रखकर उनकी हत्या कर दी गई थी. यज़ीद चाहता था कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम उसकी बैअत(बात मानले) करले लेकीन इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) ने शहादत कबूल कर ली लेकिन बुराई का साथ नहीं दिया.यजी़द की बात नही मानी. इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की याद में (पान पोई) खोल कर मानवता का संदेश देने का काम शिया इस्ना आशरी ईरानी बहुउद्देशीय संस्था के माध्यम से किया गया.कार्यक्रम के उदघाटक एडवोकेट फरहात बेग, प्रमुख उपस्थिति माजी नगरसेवक धनराज सावरकर, संस्था के अध्यक्ष-मोद्दीन हुसैन,सचिव- अमजद अली, हिमायू अली,पेकर अली,अमजद अली,शराफत अली,शाहरुख अली,हैदर अली तथा अन्य संस्था के पदाधिकारी और ईरानी समाज के लोग मौजूद थे.
कार्यक्रम मे प्रमुख उपस्थिति के रुप मे माजी नगरसेवक धनराज सावरकर थे. इस्लाम धर्म के आखरी पैगंमबर मोहम्मद मुस्तफा (स.अ.व) के नवासे इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) जिन्होंने इस्लाम धर्म को बचाने के लिए अपने पूरे परिवार की कुर्बानी दि थी. कर्बला के मैदान में यज़ीद नामक बादशाह द्वारा इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके कुनबे को प्यासा रखकर उनकी हत्या कर दी गई थी. यज़ीद चाहता था कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम उसकी बैअत(बात मानले) करले लेकीन इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) ने शहादत कबूल कर ली लेकिन बुराई का साथ नहीं दिया.यजी़द की बात नही मानी. इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) की याद में (पान पोई) खोल कर मानवता का संदेश देने का काम शिया इस्ना आशरी ईरानी बहुउद्देशीय संस्था के माध्यम से किया गया.कार्यक्रम के उदघाटक एडवोकेट फरहात बेग, प्रमुख उपस्थिति माजी नगरसेवक धनराज सावरकर, संस्था के अध्यक्ष-मोद्दीन हुसैन,सचिव- अमजद अली, हिमायू अली,पेकर अली,अमजद अली,शराफत अली,शाहरुख अली,हैदर अली तथा अन्य संस्था के पदाधिकारी और ईरानी समाज के लोग मौजूद थे.
